Shubhanshu Shukla: शुभांशु शुक्ला की धरती पर वापसी के साथ क्या लौट आई कोई रहस्यमयी ताकत ? जानिए सच्चाई!

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भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर 18 दिन बिताने के बाद धरती पर सुरक्षित वापसी की। यह ऐतिहासिक क्षण न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का पल था। शुभांशु ने एक्सिओम-4 मिशन के तहत अंतरिक्ष में भारत का नाम रोशन किया और देश के पहले अंतरिक्ष यात्री बनकर इतिहास रच दिया। इस लेख में हम उनके इस प्रेरणादायक सफर, उनके योगदान, और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर इसके प्रभाव को जानेंगे। यह कहानी आपको उत्साहित करेगी और अंत तक पढ़ने के लिए प्रेरित करेगी!

शुभांशु शुक्ला कौन हैं?

शुभांशु शुक्ला, 39 वर्षीय भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन, लखनऊ, उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। एक फाइटर पायलट के रूप में 2006 में कमीशन प्राप्त करने के बाद, उन्होंने 2,000 से अधिक उड़ान घंटों का अनुभव हासिल किया। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें भारत के पहले आईएसएस मिशन के लिए चुना। उनके शांत और अनुशासित व्यक्तित्व ने उन्हें मिशन के दौरान ‘शक्स’ (Shux) का उपनाम दिलाया।

एक्सिओम-4 मिशन:

एक्सिओम-4 मिशन, जिसमें शुभांशु शामिल थे, भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक मील का पत्थर है। यह मिशन नासा और स्पेसएक्स के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें शुभांशु और तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री—अमेरिका की पेगी व्हिट्सन, पोलैंड के स्लावोस उज़नान्स्की-विस्निव्स्की, और हंगरी के टिबोर कपु—शामिल थे। 18 दिन तक आईएसएस पर रहकर उन्होंने कई वैज्ञानिक प्रयोग किए।

अंतरिक्ष में भारत का परचम

शुभांशु शुक्ला ने 1984 में राकेश शर्मा के बाद दूसरे भारतीय अंतरिक्ष यात्री के रूप में इतिहास रचा। उनकी यह उपलब्धि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दिलाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी वापसी पर कहा, “शुभांशु ने एक अरब सपनों को प्रेरित किया है।” यह मिशन भारत की गगनयान परियोजना के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

स्पेसएक्स ड्रैगन:

स्पेसएक्स का ड्रैगन कैप्सूल, जिसका नाम ‘ग्रेस’ था, 15 जुलाई 2025 को कैलिफोर्निया के तट पर प्रशांत महासागर में उतरा। कैप्सूल 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धरती की ओर बढ़ा, और इसकी बाहरी सतह 2,000 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान सहन कर सकी। जिसे देश ने लाइव देखा।

वैज्ञानिक प्रयोग:

आईएसएस पर शुभांशु ने सात भारतीय वैज्ञानिक प्रयोग किए, जो भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण थे। ये प्रयोग भौतिकी, जीव विज्ञान, और अंतरिक्ष चिकित्सा से संबंधित थे। उनके कार्य ने भारत के गगनयान मिशन के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान किया, जो 2027 में लॉन्च होगा।

शुभांशु का प्रशिक्षण:

शुभांशु का प्रशिक्षण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और भारतीय वायुसेना के इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन द्वारा किया । अनुपम अग्रवाल,इसरो के पूर्व कमांडेंट एयर वाइस मार्शल ने बताया कि उनकी ट्रेनिंग ने भारत के अंतरिक्ष यात्री चयन प्रक्रिया को मान्यता दी। उनकी शारीरिक और मानसिक तैयारी ने उन्हें इस मिशन के लिए आदर्श उम्मीदवार बनाया।

परिवार और देश का गर्व

शुभांशु की वापसी पर उनके परिवार ने लखनऊ में खुशी का इजहार किया। उनके पिता, शंभु दयाल शुक्ला, ने कहा, “हमें गर्व है कि शुभांशु का मिशन सफल रहा।” उनकी मां ने खुशी में सड़क पर नृत्य किया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पूरे देश ने उनके स्वागत में उत्साह दिखाया।

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