रूस के सुदूर पूर्व में कामचटका प्रायद्वीप के पास 8.8 तीव्रता का एक शक्तिशाली भूकंप आया, जिसने प्रशांत महासागर के तटीय क्षेत्रों में सुनामी की लहरें उत्पन्न कर दीं। यह भूकंप, जो हाल के दशकों में सबसे शक्तिशाली भूकम्पों में से एक है, ने रूस, जापान, हवाई, और अमेरिका के पश्चिमी तट सहित कई क्षेत्रों में अलर्ट जारी करवा दिए। इस लेख में हम इस प्राकृतिक आपदा के प्रभाव, कारणों, और इससे जुड़े रोचक तथ्यों को हिंदी में समझेंगे। यह खबर आपको अंत तक बांधे रखेगी, क्योंकि यह मानवता, प्रकृति, और विज्ञान की कहानी है।
भूकंप की तीव्रता और इसका केंद्र
रूस के कामचटका प्रायद्वीप के पास सुबह 11:25 बजे (स्थानीय समय) आए इस भूकंप का केंद्र पेट्रोपावलोव्स्क-कामचट्स्की शहर से लगभग 119 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में था। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने इसकी तीव्रता को 8.8 मापा, जो इसे 2011 के जापान भूकंप (9.0 तीव्रता) के बाद सबसे शक्तिशाली भूकम्पों में से एक बनाता है। इसकी गहराई केवल 20.7 किलोमीटर थी, जिसके कारण समुद्र तल में भारी उथल-पुथल हुई और सुनामी की लहरें उत्पन्न हुईं।
रूस और जापान में प्रभाव
भूकंप के तुरंत बाद, रूस के कुरील द्वीपों में स्थित सेवेरो-कुरील्स्क में 3 से 5 मीटर ऊंची सुनामी लहरें दर्ज की गईं। स्थानीय मेयर अलेक्जेंडर ओव्स्यानिकोव ने बताया कि बंदरगाह पर बंधी नावें बह गईं और कई भवनों में पानी भर गया। जापान के होक्काइडो द्वीप पर 30 सेंटीमीटर से 1.3 मीटर तक की लहरें पहुंचीं। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने चेतावनी दी कि सुनामी की लहरें एक दिन तक प्रभावी रह सकती हैं, जिसके चलते 19 लाख से अधिक लोगों को तटीय क्षेत्रों से निकाला गया।
हवाई और अमेरिका में अलर्ट
सुनामी की लहरें प्रशांत महासागर के पार हवाई और अमेरिका के पश्चिमी तट तक पहुंचीं। हवाई में, प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र (PTWC) ने शुरू में गंभीर चेतावनी जारी की, लेकिन बाद में इसे सलाह (एडवाइजरी) में बदल दिया गया। हवाई के गवर्नर जोश ग्रीन ने बताया कि कोई बड़ी लहर नहीं आई, लेकिन तटवर्ती क्षेत्रों में खतरनाक धाराओं का जोखिम बना रहा। कैलिफोर्निया के क्रेसेंट सिटी में 1.6 फीट ऊंची लहरें दर्ज की गईं, और लोगों को समुद्र तटों से दूर रहने की सलाह दी गई।
क्यों आया इतना शक्तिशाली भूकंप?
कामचटका प्रायद्वीप प्रशांत महासागर की “रिंग ऑफ फायर” का हिस्सा है, जो भूकंपीय और ज्वालामुखीय गतिविधियों के लिए कुख्यात है। यह भूकंप एक मेगाथ्रस्ट भूकंप था, जहां एक टेक्टोनिक प्लेट दूसरी के नीचे खिसकती है, जिससे समुद्र तल ऊपर उठता है और सुनामी उत्पन्न होती है। टेक्सास विश्वविद्यालय के भूभौतिकी विशेषज्ञ नाथन बैंग्स ने बताया कि यह घटना 2004 के सुमात्रा भूकंप और 2011 के तोहोकु भूकंप से मिलती-जुलती थी, जो दोनों ही विनाशकारी सुनामी लाए थे।
नुकसान और राहत कार्य
रूस में, पेट्रोपावलोव्स्क-कामचट्स्की में इमारतों को नुकसान पहुंचा, और कई लोग मामूली चोटों के साथ अस्पताल पहुंचे। रूसी आपातकालीन मंत्रालय ने बताया कि सेवेरो-कुरील्स्क में लगभग 300 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। जापान में, कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन परिवहन सेवाएं प्रभावित हुईं। हवाई में, ट्रैफिक जाम और उड़ानें रद्द होने की खबरें आईं। राहत कार्य तेजी से शुरू किए गए, और स्थानीय प्रशासन ने स्थिति पर नजर रखी।
सुनामी चेतावनी प्रणाली
2004 के हिंद महासागर सुनामी के बाद, प्रशांत और हिंद महासागर में सुनामी चेतावनी प्रणालियों (TEWS) को मजबूत किया गया। इस घटना में, चेतावनी प्रणालियों ने समय पर अलर्ट जारी किए, जिससे लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। रूस के क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि “सभी चेतावनी प्रणालियां ठीक काम कर रही थीं।” हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि दूरस्थ द्वीपों और गांवों तक जानकारी पहुंचाने में अभी भी चुनौतियां हैं।