Rajasthan School Tragedy: पढ़ते-पढ़ते टूट गई ज़िंदगी की डोर… राजस्थान में स्कूल हादसे ने ली 7 मासूमों की जान !

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राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में शुक्रवार, 25 जुलाई 2025 को एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। सरकारी उच्च प्राथमिक स्कूल का एक हिस्सा सुबह की प्रार्थना के दौरान अचानक ढह गया, जिसके मलबे में दबकर सात छात्रों की जान चली गई और 26 अन्य घायल हो गए। इस त्रासदी ने न केवल स्थानीय समुदाय को झकझोर दिया है, बल्कि पूरे देश में स्कूल भवनों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। आइए, इस हादसे के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से जानें और समझें कि यह घटना क्यों इतनी चर्चा में है।

हादसे का विवरण

सुबह करीब 8:30 बजे, पिपलोदी सरकारी स्कूल में कक्षा 6 और 7 के छात्र अपनी दैनिक प्रार्थना सभा के लिए एकत्रित हो रहे थे। अचानक, स्कूल के एक पुराने हिस्से की छत भरभराकर गिर पड़ीं।इस हादसे में लगभग 35 छात्र मलबे में दब गए। , शिक्षकों और आपातकालीन टीमों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन सात छात्रों को बचाया नहीं जा सका। घायलों में से कुछ की हालत गंभीर है, जिन्हें झालावाड़ जिला अस्पताल और विशेष स्वास्थ्य केंद्रों में भेजा गया है।

मृतकों की पहचान

पुलिस ने मृतक छात्रों में से पांच की पहचान कुंदर, कन्हा, रैदास, अनुराधा और बादल भिल के रूप में की है। ये बच्चे 14 से 16 वर्ष की आयु के थे। इस हादसे ने उनके परिवारों को गहरा सदमा पहुंचाया है। स्थानीय निवासियों और परिजनों का कहना है कि यह हादसा स्कूल प्रशासन की लापरवाही का परिणाम है।

बचाव कार्य

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग, शिक्षक और स्कूल कर्मचारी बचाव कार्य में जुट गए। जेसीबी मशीनों और क्रेन की मदद से मलबा हटाया गया। पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भी तुरंत मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान को तेज किया। करीब 32 छात्रों को मलबे से सुरक्षित निकाला गया, लेकिन कई गंभीर रूप से घायल हैं। यह समुदाय की एकजुटता और त्वरित कार्रवाई का उदाहरण है, जिसने कई जिंदगियों को बचाने में मदद की।

भवन की स्थिति

स्थानीय लोगों के अनुसार, स्कूल का भवन पुराना और जीर्ण-शीर्ण था। पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में लगातार बारिश ने इसकी संरचना को और कमजोर कर दिया था। कई बार ग्रामीणों ने भवन की मरम्मत के लिए प्रशासन को चेतावनी दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस ने भी संकेत दिया कि भारी बारिश इस हादसे का एक प्रमुख कारण हो सकती है। यह स्थिति सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे की कमी और रखरखाव की अनदेखी को उजागर करती है।

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