हरियाणा के पांच जिलों—गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, नूंह और रेवाड़ी—में 1 अगस्त 2025 को एक विशेष मॉक ड्रिल का आयोजन होने जा रहा है, जिसका नाम ‘सुरक्षा चक्र’ रखा गया है। यह अभ्यास राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के नेतृत्व में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें सेना, NDRF, पुलिस, और सिविल डिफेंस जैसी कई एजेंसियां शामिल होंगी। इसका उद्देश्य भूकंप, रासायनिक रिसाव या अन्य आपदाओं जैसी आपातकालीन स्थितियों में प्रशासन और नागरिकों की तैयारियों को परखना है। यह खबर न केवल रोमांचक है, बल्कि यह हमें अपने समाज की सुरक्षा और जागरूकता के महत्व को भी दर्शाती है। आइए, इस मॉक ड्रिल के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से जानें।
‘सुरक्षा चक्र’ का उद्देश्य
‘सुरक्षा चक्र’ मॉक ड्रिल का मुख्य लक्ष्य आपदा प्रबंधन में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करना है। यह अभ्यास यह सुनिश्चित करेगा कि भूकंप, रासायनिक रिसाव, या अन्य आपातकालीन स्थिति में प्रशासन और नागरिक तुरंत और प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया दे सकें। यह ड्रिल यह भी जांचेगी कि स्थानीय प्रशासन, अग्निशमन विभाग, और अन्य टीमें कितनी तेजी से एकजुट होकर काम कर सकती हैं।
क्यों चुने गए ये पांच जिले?
गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, नूंह और रेवाड़ी को इस ड्रिल के लिए इसलिए चुना गया है, क्योंकि ये जिले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का हिस्सा हैं और हाल के महीनों में इन क्षेत्रों में भूकंपीय गतिविधियों की संभावना देखी गई है। इसके अलावा, इन जिलों में औद्योगिक इकाइयों और घनी आबादी के कारण आपदा प्रबंधन की विशेष आवश्यकता है।
मॉक ड्रिल की समयरेखा
यह ड्रिल 1 अगस्त को सुबह 10 बजे शुरू होगी और शाम तक चलेगी। इस दौरान विभिन्न गतिविधियां जैसे सायरन बजाना, ब्लैकआउट, और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना शामिल होगा। 29 जुलाई को मानेकशॉ सेंटर में वरिष्ठ अधिकारियों की एक बैठक होगी, जहां रणनीति और जिम्मेदारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। 30 जुलाई को कंप्यूटर सिमुलेशन के माध्यम से योजनाओं की जांच होगी, और 1 अगस्त को ग्राउंड-लेवल पर यह अभ्यास होगा।
नागरिकों की भूमिका
इस मॉक ड्रिल में नागरिकों की भागीदारी अहम होगी। लोगों को सायरन सुनते ही सुरक्षित स्थानों पर जाने, अफवाहों से बचने, और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। यह ड्रिल न केवल प्रशासन की तैयारियों को परखेगी, बल्कि आम लोगों को भी आपातकाल में सही कदम उठाने की ट्रेनिंग देगी। NDMA ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस अभ्यास को गंभीरता से लें, लेकिन घबराएं नहीं।
ब्लैकआउट और सायरन का महत्व
मॉक ड्रिल के दौरान रात 7:50 से 8:00 बजे तक ब्लैकआउट किया जाएगा। इस दौरान सभी घरों, वाहनों, और सार्वजनिक स्थानों की लाइटें बंद रखने के निर्देश हैं। सायरन हवाई हमले या आपदा की चेतावनी का प्रतीक होंगे, जिससे लोग तुरंत सुरक्षित स्थानों की ओर बढ़ सकें। यह अभ्यास युद्ध या प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति में नागरिकों की त्वरित प्रतिक्रिया को सुनिश्चित करेगा।
विभिन्न एजेंसियों का समन्वय
इस ड्रिल में सेना, NDRF, सिविल डिफेंस, पुलिस, अग्निशमन विभाग, और स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ NCC, NSS, और नेहरू युवा केंद्र जैसे संगठन भी हिस्सा लेंगे। यह समन्वय आपातकाल में त्वरित और संगठित प्रतिक्रिया के लिए जरूरी है। गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे जिलों में विशेष इंतजाम किए गए हैं, जहां औद्योगिक क्षेत्रों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।