Delhi-NCR Earthquake: दिल्ली-NCR में भूकंप का झटका, हरियाणा के झज्जर में 4.4 तीव्रता का भूकंप, लोगों में दहशत

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दिल्ली-NCR: सबह दिल्ली-NCR के निवासियों के लिए एक डरावना अनुभव लेकर आई, जब सुबह 9:04 बजे एक 4.4 तीव्रता का भूकंप आया। इस भूकंप का केंद्र हरियाणा के झज्जर जिले में था, जो दिल्ली से मात्र 51 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर थी, जिसके कारण दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद और आसपास के क्षेत्रों में तेज झटके महसूस किए गए। हालांकि, अभी तक किसी बड़े नुकसान या हताहत की खबर नहीं है, लेकिन इस घटना ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की भूकंपीय जोखिमों को फिर से चर्चा में ला दिया है। आइए, इस घटना के हर पहलू को विस्तार से जानते हैं।

भूकंप का समय और प्रभाव:

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप सुबह 9:04:50 बजे आया और इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.4 मापी गई। यह भूकंप 10 किलोमीटर की उथली गहराई पर था, जिसके कारण झटके अधिक तीव्र महसूस हुए। दिल्ली-NCR के अलावा, मेरठ, शमली, आगरा, गोरखपुर, और हरियाणा के सोनीपत, रोहतक और हिसार जैसे क्षेत्रों में भी झटके महसूस किए गए। कई निवासियों ने बताया कि झटके 8 से 10 सेकंड तक चले, जिससे लोग डर के मारे अपने घरों और दफ्तरों से बाहर भागे।

निवासियों की प्रतिक्रिया:

भूकंप के झटकों ने दिल्ली-NCR में हलचल मचा दी। गाजियाबाद के एक निवासी ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया, “मैं अपनी दुकान में बैठा था जब अचानक ऐसा लगा जैसे कोई पूरी दुकान को हिला रहा हो। यह बहुत डरावना था।” दिल्ली के एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “मैंने पंखे को हिलते देखा और तुरंत बाहर भागा। यह कुछ सेकंड तक चला, लेकिन बहुत डर लगा।” सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे “लंबे समय में सबसे लंबा भूकंप” बताया, जिसने उनकी चिंता को और बढ़ा दिया।

दिल्ली मेट्रो में रुकावट:

भूकंप के तुरंत बाद, दिल्ली मेट्रो ने मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत 2-3 मिनट के लिए ट्रेनों को रोक दिया। एक यात्री, अरशद ने बताया, “ट्रेन सुबह 9:04-9:05 बजे के आसपास रुकी। हमें कुछ समझ नहीं आया, लेकिन बाद में पता चला कि यह भूकंप के कारण था।” यह कदम सुरक्षा के दृष्टिकोण से उठाया गया था, और बाद में सेवाएं सामान्य रूप से शुरू हो गईं।

भूकंपीय जोन IV: दिल्ली की भेद्यता

दिल्ली भूकंपीय जोन IV में आता है, जिसे दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) द्वारा “उच्च क्षति जोखिम क्षेत्र” के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इस जोन में 5-6 तीव्रता के भूकंप होने की संभावना रहती है, और कभी-कभी 7-8 तीव्रता के भूकंप भी आ सकते हैं। दिल्ली की हिमालय से निकटता और दिल्ली-हरिद्वार रिज, महेंद्रगढ़-देहरादून फॉल्ट जैसी सक्रिय भ्रंश रेखाएं इसे भूकंप के लिए संवेदनशील बनाती हैं।

भूकंप का भूवैज्ञानिक कारण

उत्तर भारत, विशेष रूप से हिमालय क्षेत्र, भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर के कारण भूकंपीय रूप से सक्रिय है। DDMA के अनुसार, ये प्लेटें लगातार एक-दूसरे के खिलाफ दबाव बनाती हैं, जिससे ऊर्जा जमा होती है। जब यह ऊर्जा अचानक निकलती है, तो भूकंप आता है। गुरुवार का भूकंप भी इसी प्रक्रिया का परिणाम था।

कोई बड़ा नुकसान नहीं, लेकिन सतर्कता जरूरी

पुलिस ने बयान में कहा, “आज सुबह दिल्ली-NCR में आए भूकंप से अभी तक किसी नुकसान की सूचना नहीं मिली है। ” राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) ने भी एक सलाह जारी की, जिसमें लोगों से भूकंप के दौरान और बाद में सावधानी बरतने को कहा गया। NDRF ने सुझाव दिया कि लोग लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का उपयोग करें, खुले स्थान पर जाएं, और क्षतिग्रस्त इमारतों

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