बिहार में महिलाओं और बच्चों के विकास के लिए एक नई लहर शुरू हो चुकी है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने हाल ही में कई योजनाओं और पहलों की शुरुआत की है, जो समाज के सबसे कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने और उनके जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। यह लेख आपको बिहार में चल रही इन योजनाओं, उनके प्रभाव, और भविष्य की संभावनाओं के बारे में रोचक और प्रेरणादायक जानकारी देगा। आइए, इस यात्रा में शामिल हों और जानें कि कैसे ये पहल बिहार को एक समृद्ध और समावेशी राज्य बनाने में योगदान दे रही हैं।
महिला सशक्तिकरण: नई दिशा, नया जोश
महिला एवं बाल विकास विभाग का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक रूप से सशक्त बनाना है। बिहार सरकार ने इसके लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जैसे मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ। ये योजनाएं लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देती हैं और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को रोकने में मदद करती हैं। इन पहलों ने न केवल महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाया है, बल्कि उन्हें समाज में बराबरी का दर्जा दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
बच्चों का भविष्य
बच्चे किसी भी समाज का भविष्य होते हैं, और बिहार सरकार इसे अच्छी तरह समझती है। एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना के तहत, 0-6 वर्ष की आयु के बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं, और प्रारंभिक शिक्षा प्रदान की जाती है। राज्य में 35,700 से अधिक आंगनवाड़ी केंद्र इस मिशन को पूरा करने में जुटे हैं। इन केंद्रों पर बच्चों को पौष्टिक भोजन, टीकाकरण, और स्वास्थ्य जांच की सुविधा मिलती है, जिससे कुपोषण और शिशु मृत्यु दर में कमी आई है।
पोषण अभियान
पोषण अभियान भारत सरकार का एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है, जिसे बिहार में भी उत्साह के साथ लागू किया जा रहा है। इस अभियान का लक्ष्य कुपोषण और एनीमिया को कम करना है। गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, और बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। बिहार के कई जिलों में आंगनवाड़ी केंद्रों पर टेक होम राशन योजना के तहत तैयार भोजन और पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य सामग्री वितरित की जा रही है। यह पहल बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य में सुधार लाने में कारगर साबित हो रही है।
महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल
महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए बिहार सरकार ने कई कदम उठाए हैं। महिला हेल्पलाइन (181) और वन स्टॉप सेंटर्स महिलाओं को घरेलू हिंसा और उत्पीड़न से बचाने के लिए स्थापित किए गए हैं। ये केंद्र महिलाओं को कानूनी सहायता, परामर्श, और सुरक्षित आश्रय प्रदान करते हैं। इसके अलावा, उज्ज्वला योजना के तहत तस्करी पीड़ित महिलाओं और बच्चों के पुनर्वास के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
शिक्षा
शिक्षा के बिना सशक्तिकरण अधूरा है। बिहार में लक्ष्मी लाडली योजना और मुख्यमंत्री साइकिल योजना जैसी पहलों ने लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा दिया है। इन योजनाओं के तहत लड़कियों को स्कूल जाने के लिए प्रोत्साहन राशि और मुफ्त साइकिल दी जाती है। इसका परिणाम यह हुआ है कि बिहार में लड़कियों का स्कूल ड्रॉपआउट दर कम हुआ है, और अधिक लड़कियां उच्च शिक्षा की ओर बढ़ रही हैं।
आर्थिक स्वावलंबन
महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए बिहार सरकार ने महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) को बढ़ावा दिया है। इन समूहों के माध्यम से महिलाएं छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू कर रही हैं, जैसे कि सिलाई, हस्तशिल्प, और खाद्य प्रसंस्करण। जीविका परियोजना ने लाखों महिलाओं को उद्यमिता के अवसर प्रदान किए हैं, जिससे उनकी आय बढ़ी है और परिवार का जीवन स्तर सुधरा है।