केरल की 38 वर्षीय नर्स निमिषा प्रिया की कहानी इन दिनों सुर्खियों में है। यमन की जेल में बंद निमिषा को 2017 में एक यमनी नागरिक की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। अब उनकी फांसी की तारीख 16 जुलाई 2025 निर्धारित की गई है। इस मामले ने न केवल भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है। क्या निमिषा की जान बच पाएगी? आइए, इस दिल दहला देने वाली कहानी को विस्तार से जानते हैं।
निमिषा प्रिया कौन हैं?
निमिषा प्रिया, केरल के पलक्कड़ जिले के कोल्लेंगोड की रहने वाली हैं। एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली निमिषा ने 2008 में बेहतर अवसरों की तलाश में यमन का रुख किया। उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर थे, और निमिषा अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए विदेश गई थीं। एक नर्स के रूप में उन्होंने यमन में अपनी सेवाएं शुरू कीं और बाद में एक यमनी नागरिक, तलाल अब्दो महदी, के साथ मिलकर एक क्लिनिक शुरू किया।
क्या था हत्या का मामला?
2017 में निमिषा पर अपने बिजनेस पार्टनर तलाल अब्दो महदी की हत्या का आरोप लगा। बताया जाता है कि तलाल ने निमिषा के पासपोर्ट को जब्त कर लिया था और उनके साथ दुर्व्यवहार किया। निमिषा ने अपने पासपोर्ट को वापस पाने के लिए तलाल को बेहोश करने की कोशिश की, लेकिन गलती से दी गई दवा की अधिक मात्रा ने उनकी जान ले ली। इसके बाद, निमिषा ने घबराहट में उनके शव को टुकड़ों में काटकर एक पानी की टंकी में फेंक दिया। 2018 में उनकी गिरफ्तारी हुई, और 2020 में सना की एक अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई।
यमन का शरिया कानून और ब्लड मनी
यमन में शरिया कानून के तहत कुछ हत्या के मामलों में “ब्लड मनी” या “दिया” का प्रावधान है। इसके तहत, पीड़ित के परिवार को मुआवजा देकर दोषी की सजा को माफ किया जा सकता है। निमिषा के परिवार ने तलाल के परिवार को 1 मिलियन डॉलर (लगभग 8.6 करोड़ रुपये) की पेशकश की है। हालांकि, यमन में चल रहे गृहयुद्ध के कारण यह बातचीत जटिल हो गई है। क्या तलाल का परिवार इस मुआवजे को स्वीकार करेगा? यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है।
भारत सरकार की भूमिका
निमिषा के मामले में भारत सरकार और विदेश मंत्रालय की भूमिका अहम है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि सरकार निमिषा के मामले से अवगत है और हर संभव सहायता प्रदान कर रही है। निमिषा के पति, टॉमी थॉमस, ने हाल ही में केरल के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात की और बताया कि केंद्र और राज्य सरकारें उनकी रिहाई के लिए प्रयास कर रही हैं। लेकिन समय कम है, और तेजी से कदम उठाने की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
14 जुलाई 2025 को भारत का सुप्रीम कोर्ट इस मामले में एक याचिका पर सुनवाई करने वाला है। “सेव निमिषा प्रिया – इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल” ने यह याचिका दायर की है, जिसमें केंद्र सरकार से यमनी अधिकारियों के साथ कूटनीतिक बातचीत करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से इस मामले में उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। यह सुनवाई निमिषा की जिंदगी के लिए आखिरी उम्मीद हो सकती है।