अजमेर, राजस्थान का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक शहर, इन दिनों प्रकृति की मार झेल रहा है। लगातार मूसलाधार बारिश ने शहर को पानी में डुबो दिया है, जिससे सड़कें नदियों में बदल गई हैं और लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह और पुष्कर के लिए मशहूर यह शहर अब बाढ़ की चपेट में है। यह लेख अजमेर की ताजा स्थिति, बाढ़ के प्रभाव, और राहत कार्यों की जानकारी देगा, जो पाठकों को अंत तक बांधे रखेगा।
भारी बारिश ने मचाया हाहाकार
पिछले 72 घंटों से अजमेर में रुक-रुक कर हो रही भारी बारिश ने शहर को जल प्रलय की स्थिति में ला दिया। मौसम विभाग के अनुसार, इस बार की बारिश ने पिछले दशक के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। एक दिन में 100 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई, जिसने शहर की जल निकासी व्यवस्था को पूरी तरह विफल कर दिया। आनासागर झील के किनारे टूटने से आसपास के इलाके जलमग्न हो गए हैं।
सड़कों पर नदी का दृश्य
शहर की प्रमुख सड़कें, जैसे वैशाली नगर, स्टेशन रोड, और दौलत बाग, अब नदियों का रूप ले चुकी हैं। कमर तक पानी भरने से यातायात पूरी तरह ठप है। कई गाड़ियां पानी में फंस गईं, और कुछ तो बह गईं। स्थानीय निवासी रमेश मीणा ने बताया, “हमारी गली में इतना पानी है कि घर से निकलना असंभव हो गया है। प्रशासन को जल्दी कदम उठाने चाहिए।”
घरों में पानी, सामान नष्ट
बाढ़ का पानी न केवल सड़कों पर बल्कि घरों और दुकानों में भी घुस गया है। निचले इलाकों जैसे सुभाष नगर और भट्टा बस्ती में स्थिति सबसे खराब है। लोगों ने अपने सामान को बचाने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव ने सब कुछ तबाह कर दिया। एक स्थानीय निवासी, किरण शर्मा, ने कहा, “हमारा सारा सामान खराब हो गया। अब हम बच्चों के साथ कहां जाएंगे?”
प्रशासन की तत्परता
जिला प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत राहत कार्य शुरू किए। जिला कलेक्टर राजेंद्र सिंह और नगर निगम के अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें जलमग्न इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं। हालांकि, कुछ निवासियों का कहना है कि राहत कार्यों की गति और संसाधन अभी भी अपर्याप्त हैं।
आनासागर झील
आनासागर झील, जो अजमेर की शान मानी जाती है, इस बार शहर के लिए संकट बन गई है। झील का पानी आसपास के इलाकों में फैल गया, जिससे फव्वारा चौराहा और बजरंग गढ़ जैसे क्षेत्र पूरी तरह डूब गए। प्रशासन ने झील के चैनल गेट खोल दिए, लेकिन इससे स्थिति और बिगड़ गई। विशेषज्ञों का कहना है कि झील की नियमित सफाई और रखरखाव की कमी इसकी वजह है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव
बाढ़ ने अजमेर की स्वास्थ्य सेवाओं को भी प्रभावित किया है। जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में पानी घुसने से मरीजों को इलाज में परेशानी हो रही है। एंबुलेंस सेवाएं बाधित हैं, क्योंकि कई सड़कें बंद हैं। प्रशासन ने अस्थायी चिकित्सा शिविर स्थापित किए हैं, लेकिन दवाइयों की कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई है।
स्कूल-कॉलेज बंद, शिक्षा पर असर
शहर में भारी बारिश के कारण सभी शैक्षणिक संस्थान अगले आदेश तक बंद हैं। कई स्कूलों में पानी भर गया, जिससे किताबें और फर्नीचर खराब हो गए। ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने की कोशिश की गई, लेकिन इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या के कारण यह भी मुश्किल हो रहा है। अभिभावक बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
व्यापारियों की कमर टूटी
अजमेर के व्यापारी इस बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। केसरगंज और नला बाजार जैसे व्यापारिक केंद्रों में दुकानों में पानी घुसने से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, और खाद्य सामग्री की दुकानें सबसे ज्यादा प्रभावित हुईं। व्यापारी संघ ने सरकार से तत्काल मुआवजे की मांग की है।