ग्रेटर नोएडा के शारदा विश्वविद्यालय में हाल ही में एक दुखद घटना ने पूरे देश का ध्यान खींचा। एक युवा बीडीएस छात्रा, ज्योति शर्मा, ने अपने छात्रावास के कमरे में आत्महत्या कर ली। इस घटना ने न केवल विश्वविद्यालय प्रशासन पर सवाल उठाए, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक संस्थानों में उत्पीड़न के मुद्दों को भी सामने लाया। इस ब्लॉग पोस्ट में, हम इस मामले की गहराई में जाएंगे, तथ्यों को उजागर करेंगे, और इसके सामाजिक प्रभावों पर चर्चा करेंगे।
घटना का विवरण:
18 जुलाई 2025 की रात, शारदा विश्वविद्यालय के छात्रावास में ज्योति शर्मा ने अपने कमरे में पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। वह गुरुग्राम की रहने वाली थी और बीडीएस के द्वितीय वर्ष में पढ़ रही थी। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें ज्योति ने दो प्रोफेसरों और विश्वविद्यालय प्रबंधन पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया। इस नोट में उन्होंने लिखा कि शिक्षकों का व्यवहार और लगातार अपमान उनकी आत्महत्या का कारण बना।
सुसाइड नोट:
ज्योति के सुसाइड नोट ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने लिखा, “मैं अब और नहीं जी सकती। मेरे शिक्षकों ने मुझे मानसिक रूप से इतना परेशान किया कि मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा।” नोट में विशेष रूप से पीसीपी और डेंटल मैटेरियल्स के शिक्षकों का नाम लिया गया, जिन्हें ज्योति ने अपने तनाव और अपमान का जिम्मेदार ठहराया। यह नोट न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी को दर्शाता है, बल्कि यह भी सवाल उठाता है कि क्या शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता है?
परिवार का दर्द:
ज्योति के परिवार ने विश्वविद्यालय प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार, ज्योति ने कई बार शिक्षकों के व्यवहार की शिकायत की थी, लेकिन प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। परिवार का कहना है कि अगर समय रहते उनकी शिकायतों पर ध्यान दिया जाता, तो शायद यह त्रासदी टल सकती थी। परिवार के इस दर्द ने अन्य छात्रों और अभिभावकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या हमारे बच्चे शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षित हैं?
छात्रों का आक्रोश:
ज्योति की आत्महत्या की खबर फैलते ही विश्वविद्यालय के छात्रों में आक्रोश फैल गया। सैकड़ों छात्रों ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर धरना दिया और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने मांग की कि दोषी प्रोफेसरों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए और विश्वविद्यालय में एक निष्पक्ष शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाए। इस प्रदर्शन ने पूरे देश में चर्चा को जन्म दिया और सोशल मीडिया पर #JusticeForJyoti ट्रेंड करने लगा।
पुलिस जांच:
पुलिस ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई शुरू की। दो प्रोफेसरों, जिनका नाम सुसाइड नोट में था, को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने विश्वविद्यालय प्रशासन से भी पूछताछ शुरू की और ज्योति के कमरे से मिले साक्ष्यों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि ज्योति लंबे समय से मानसिक तनाव में थी, और उनके सहपाठियों ने भी शिक्षकों के व्यवहार की पुष्टि की। हालांकि, जांच अभी भी जारी है, और पूर्ण निष्कर्ष तक पहुंचना बाकी है।