Haryana Water Conservation Scheme: हरियाणा की जल संरक्षण योजना पर धान की सीधी बिजाई पर किसानों को मिलेगा ₹4500 प्रति एकड़ प्रोत्साहन

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

चंडीगढ़, 1 जुलाई 2025: हरियाणा सरकार ने जल संरक्षण को बढ़ावा देने और किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। नायब सैनी सरकार ने धान की सीधी बिजाई (Direct Seeding of Rice – DSR) को अपनाने वाले किसानों के लिए ₹4500 प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि की घोषणा की है। यह योजना न केवल पानी की बचत करेगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और खेती को और अधिक टिकाऊ बनाने में भी मदद करेगी। आइए, इस योजना के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से समझते हैं।

जल संरक्षण की आवश्यकता

हरियाणा में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। पारंपरिक धान की खेती, जिसमें खेतों को पानी से भरा जाता है, भूजल की भारी खपत का कारण बनती है। विशेषज्ञों के अनुसार, धान की पारंपरिक रोपाई विधि में प्रति किलोग्राम चावल के लिए लगभग 3700 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। यह योजना भूजल संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो हरियाणा के भविष्य को सुरक्षित करने में मदद करेगी।

डीएसआर तकनीक

सीधी बिजाई तकनीक (DSR) में धान के बीजों को सीधे खेत में बोया जाता है, जिससे नर्सरी तैयार करने और रोपाई की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। इस तकनीक से 15-20% पानी की बचत होती है और श्रम लागत में भी कमी आती है। यह पर्यावरण के लिए लाभकारी होने के साथ-साथ किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी फायदेमंद है।

₹4500 प्रति एकड़ प्रोत्साहन

हरियाणा सरकार ने DSR तकनीक को अपनाने वाले किसानों को ₹4500 प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि देने का फैसला किया है। यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा की जाएगी। यह आर्थिक सहायता किसानों को नई तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी और उनकी आय में वृद्धि करेगी।

पंजीकरण प्रक्रिया

इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ (MFMB) पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा। पंजीकरण की अंतिम तारीख 30 जून 2026 निर्धारित की गई है। पंजीकरण के बाद, एक समिति जिसमें कृषि विभाग के अधिकारी, पटवारी, और नंबरदार शामिल होंगे, खेतों का भौतिक सत्यापन करेगी। यह प्रक्रिया पारदर्शिता सुनिश्चित करती है और केवल पात्र किसानों को ही लाभ मिलेगा।

किन जिलों में लागू होगी योजना?

यह योजना हरियाणा के 12 धान उत्पादक जिलों में लागू की जाएगी, जिनमें अंबाला, यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, पानीपत, जींद, सोनीपत, फतेहाबाद, सिरसा, रोहतक और हिसार शामिल हैं। इन जिलों में DSR तकनीक से धान की खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, जैसे करनाल और कुरुक्षेत्र में 10,000 एकड़ और कैथल व जींद में 11,000 एकड़।

पर्यावरणीय लाभ

DSR तकनीक न केवल पानी की बचत करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता को भी बनाए रखती है। यह तकनीक खेतों में कम पानी का उपयोग करके भूजल स्तर को स्थिर करने में मदद करती है। साथ ही, यह तकनीक खरपतवार की समस्या को कम करने और कीटों के हमले को नियंत्रित करने में भी सहायक है, जिससे रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम होता है।

आर्थिक लाभ

DSR तकनीक से किसानों की लागत में 15-20% की कमी आती है, क्योंकि इसमें नर्सरी तैयार करने और रोपाई की लागत नहीं लगती। इसके अलावा, श्रम की आवश्यकता भी कम होती है, जिससे किसानों को प्रति एकड़ लगभग ₹4000-5000 की अतिरिक्त बचत होती है। यह योजना किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Leave a Comment